NEET-PG entrance scam unearthed by Delhi Police

Delhi Police have unearthed a scam in the NEET-PG examination conducted by NBE in December 2016 and arrested two persons involved in it. Police are in search of other members who were part of this racket spread over 5 states. The leaders have been identified as Abhishek Singh from Varanasi and Atul Vats from Bihar.

Modus operandi: Atul Vats had befriended and bribed the site supervisor of a centre in Dwarka, who agreed to send the questions over a sharing software. Three doctors had been hired to answer the questions and were put up in a nearby hotel in Dwarka. They solved the questions and sent them to the candidates. During interrogation, police have got the information that lakhs of rupees were charged from the candidates. Police are looking for Rahul (who had arranged the three doctors) and other persons involved in the scam.

मध्य प्रदेश के व्यापम घोटाले की तरह एमडी/एमएस की ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा में धांधली का मामला सामने आया है। सॉफ्टवेयर से छेड़छाड़ कर ऐसे लोगों को परीक्षा पास करा दी गई जो इसके लायक नहीं थे। इस मामले में पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है। इस फर्जीवाड़े के तार दिल्ली के अलावा यूपी, बिहार, झारखंड, और बेंगलुरु से जुड़े हुए हैं।

पुलिस को मामले में एक दर्जन से ज्यादा और लोगों की तलाश है। पुलिस की गिरफ्त में आए दो लोगों की पहचान वाराणसी निवासी अभिषेक सिंह और बिहार निवासी अतुल वत्स के रूप में हुई है। आरोप है कि इन्होंने दिसंबर 2016 में राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड की तरफ से आयोजित एमडी और एमएस की ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा में फर्जीवाड़ा किया। सूत्रों ने बताया कि इस पूरे फर्जीवाड़े में अतुल वत्स ने अहम भूमिका निभाई। उसने परीक्षा के साइट सुपरवाइजर को लालच देकर अपने साथ मिला लिया।

दो गिरफ्तार
परीक्षा में आए सवालों के जवाब देने के लिए तीन डॉक्टर दिल्ली के द्वारका स्थित एक होटल में मौजूद थे। सुपरवाइजर ने शेयरिंग सॉफ्टवेयर की मदद से सवाल इन डॉक्टरों तक पहुंचा दिए। डॉक्टरों ने जवाब लिखकर केंद्रों पर मौजूद परीक्षार्थियों को भेज दिए। पुलिस ने मामले में दो माह छानबीन की। इसके बाद 10 अप्रैल को अभिषेक और अतुल को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों ने पुलिस को बताया कि उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर इस परीक्षा में बैठने वाले डॉक्टरों की मदद की है। पुलिस ने अदालत में पेश कर इन युवकों को दस दिन की रिमांड पर लिया और पूरी जानकारी जुटाई।

पूछताछ में अभिषेक ने पुलिस को बताया कि प्रश्नपत्र हल करने के लिए उसके दोस्त राहुल ने डॉक्टरों को बुलाया था। राहुल के बारे में उसने कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी है। लेकिन इस खुलासे के बाद पुलिस राहुल की तलाश कर रही है। उसके मिलने के बाद उन डॉक्टरों को भी गिरफ्तार किया जाएगा जिन्होंने प्रश्नपत्र हल किया था।

एमडी/एमएस दाखिला फर्जीवाड़े के तार पांच राज्यों से जुड़ रहे हैं। अब तक की पुलिस जांच में बिहार, बेंगलुरु, दिल्ली, यूपी और झारखंड के युवक फर्जीवाड़े में शामिल हैं। पुलिस ने इनमें से 12 संदिग्ध युवकों की पहचान कर ली है और उनकी तलाश में छापेमारी की जा रही है। इसके अलावा कुछ संदिग्ध युवकों को भी पूछताछ के लिए बुलाया गया है।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस मामले में सबसे पहले कुछ संदिग्ध मोबाइल नंबर पुलिस को मिले थे। इनकी जब छानबीन की गई तो पता चला कि एमडी/एमएस दाखिला फर्जीवाड़े में दिल्ली से लेकर बेंगलुरु तक के लोग शामिल हैं। इसके साथ ही, पता चला कि ऑनलाइन परीक्षा पास करवाने के लिए लाखों रुपये का लेन-देन किया गया। फिलहाल अभी साफ नहीं हो सका है कि किस आरोपी को कितनी रकम मिली। पुलिस ने इस मामले में गिरफ्तार अभिषेक सिंह और अतुल वत्स को अदालत में पेश कर दस दिन के रिमांड पर लिया था।

पूछताछ के दौरान आरोपियों ने बताया कि परीक्षा केंद्र में बैठने वाले परीक्षार्थियों को साफ्टवेयर से छेड़छाड़ कर जवाब भेजे थे। वहीं, सवाल भी साफ्टवेयर के जरिए ही उन्हें मिले थे। द्वारका के एक होटल में बैठकर तीन डॉक्टरों ने यह प्रश्नपत्र हल किया था। आरोपी अभिषेक ने पुलिस को बताया कि प्रश्नपत्र हल करने के लिए उसके दोस्त राहुल ने डॉक्टरों को बुलाया था। हालांकि, राहुल के बारे में उसने कोई स्पष्ट जानकारी पुलिस को नहीं दी है। मगर इस खुलासे के बाद पुलिस राहुल की तलाश कर रही है। उसके मिलने के बाद उन डॉक्टरों को भी गिरफ्तार किया जाएगा जिन्होंने यह प्रश्नपत्र हल किया था।

1अप्रैल 2008 : अपराध शाखा ने मुन्ना भाई एमबीबीएस फिल्म की तर्ज पर किसी अन्य शख्स की जगह परीक्षा दे रहे सात डॉक्टरों को जेएनयू स्थित केन्द्र से गिरफ्तार किया था। आरोपी मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन में किसी अन्य शख्स की जगह परीक्षा दे रहे थे। उन्हें परीक्षा में बैठने के लिए प्रत्येक छात्र की तरफ से चार लाख रुपये मिले थे।

9 जनवरी 2012: एम्स द्वारा आयोजित पोस्ट ग्रेजुएट एंट्रेंस टेस्ट में पुलिस ने एक डॉक्टर सहित पांच लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने उनके पास से छह कमीज बरामद की। इस कमीज के कालर में ब्लूटुथ लगा हुआ था। इसके अलावा एक कैमरा लगा हुआ था, जिसकी मदद से तस्वीर लेकर परीक्षा दे रहे छात्र ने प्रश्नपत्र को बाहर भेजा और फिर उसे ईयरफोन पर जवाब बताए गए।